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मोदी वाराणसी पहुंचे, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों को नाव से घाट घुमाएंगे

     Last Updated:(10:52 AM) 12 Mar 2018
वाराणसी. पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों सोमवार को वाराणसी पहुंचेंगे। दोनों नेता यूपी में करीब साढ़े पांच घंटे बिताएंगे। इस दौरान दोनों राज्यभर में करीब 1500 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्टस का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। पीएम मोदी वाराणसी में 1000 की क्षमता वाले विधवा आश्रम का एलान भी कर सकते हैं। मोदी भारत दौरे पर आए राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों की भी भव्य खातिरदारी करेंगे। उन्हें नाव से गंगा की सैर कराएंगे और वाराणसी के घाट दिखाएंगे। बताया जा रहा है कि सुरक्षा के मद्देनजर आखिरी समय में कुछ कार्यक्रम रद्द भी किए जा सकते हैं। जापान के पीएम शिंजो आबे के बाद मैक्रों वाराणसी वाले दूसरे राष्ट्राध्यक्ष होंगे। जापान के पीएम शिंजो आबे ने यहां गंगा आरती भी की थी।

पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों मिर्जापुर जिले के छानबे दादर कला गांव में प्रदेश के सबसे बड़े सोलर पावर प्लांट का शुभारंभ करेंगे। 650 करोड़ की लागत से 382 एकड़ में बना ये प्लांट 18 महीनों में तैयार हुआ है। इसमें 3 लाख 18 हजार सोलर प्लेटें लगाई गई हैं। गांव के प्रधान विजय कुमार बिन्द ने DainikBhaskar.com को बताया कि गांव में सिर्फ पांच लोग ग्रेजुएट हैं।  बाकी युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। इतना बड़ा प्लांट लगने में सिर्फ 18 महीने लगे, लेकिन अभी तक किसी को रोजगार नहीं मिला। यहां सिर्फ एक प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल है।

- 12 मार्च को दरभंगा घाट स्थित ब्रज रमा पैलेस पहुंचते ही 21 ब्राह्मण वैदिक मंत्रों के साथ मोदी और मैक्रों का स्वागत करेंगे। दोनों यहीं लंच लेंगे। पैलेस की ऊपरी मंजिल पर स्थित ओपन रेस्टोरेंट को काशी का लुक देने के लिए घाटों पर लगने वाली छतरियों को लगाया गया है।लंच के बाद दोनों नेता यहां भारत की पहली अनोखी हैंड लिफ्ट भी देखेंगे। रेस्टोरेंट में दोनों नेता सोलर एनर्जी, एजुकेशन, कल्चर, गंगा घाटों के विकास, हेरीटेज बिल्डिंगों पर बातचीत करेंगे।

- बीएचयू के प्रोफेसर आर श्रीवास्तव बताते है कि नागपुर के राजा मुंशी श्रीधर ने 1812 में महल का निर्माण कराया था। 1920 में इसको दरभंगा नरेश कामेश्वर नाथ ने खरीद लिया और नाम दरभंगा पैलेस रख दिया। उस समय रानी और राजमाता के गंगा स्नान के लिए महल के पिछले हिस्से से निकलती थीं। दासियां गलियों, सीढ़ियों और घाट पर साड़ियों से घेरा बना देती थी। बाद में नरेश कामेश्वर नाथ ने लकड़ी और लोहे के चक्र पर चलने वाली पहली हैण्ड लिफ्ट को दरभंगा महल में लगवाया। रानी और राजमाता को आम जनता न देख पाए इसलिये नरेश कामेश्वर नाथ ने 70 फीट ऊंचे दरभंगा महल के बाहरी हिस्से की मीनार में हाथ से चलने वाली लिफ्ट बनवाई। 35 साल पहले इस पैलेस को स्वर्गीय बृज लाल दास ने खरीद लिया और होटल में तब्दील कर दिया। पुरानी लिफ्ट को ठीक कराने की काफी कोशिशें की गईं, लेकिन बाद में इसमें इलेक्ट्रिकल लिफ्ट लगवानी पड़ा।
- पैलेस के जर्जर हिस्सों को ठीक करने और ओल्ड लुक देने में 12 साल लग गए। दिल्ली, जयपुर, साउथ, कोलकाता, बिहार के दर्जनों इंजीनियरों और मजदूरों ने काम करके 1812 और उसके बाद 1920 में कराये गए नक्काशियों में जान डाली। होटल में 32 कमरे हैं।मोदी और मैक्रों बड़ालालपुर में बने बुनकरों, शिल्पियों के लिए ट्रेड फैसिलिटी सेंटर के म्यूजियम देखने जाएंगे। 305 करोड़ की लागत और 43445 स्कवायर मीटर बने में इस सेंटर का इनॉग्रेशन पीएम मोदी ने सितंबर 2017 में किया था। म्यूजियम के दोनों वस्त्र, कार्पेट, क्राफ्ट, समेत कई पुरानी चीजों को देखेंगे। ग्राउंड फ्लोर में बनारसी साड़ी की हिस्ट्री, इनकी वेरायटी और हैंडलूम देखने को मिलेगा। म्यूजियम के मैनेजर रोशन कुमार के मुताबिक, बनारसी वस्त्र महाभारत और रामायण के समय भी बनता था, जिसे पीताम्बर कहा जाता था। बौद्धकाल में यहां के वस्त्रों को कासिया कहा गया। गौतम बुद्ध भी यहीं के वस्त्र पहनते थे।

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