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टीडीपी ने किया एनडीए से अलग होने का एलान, बीजेपी को बताया ‘ब्रेक जनता प्रॉमिस’ पार्टी

     Last Updated:(12:17 PM) 16 Mar 2018
नई दिल्ली.आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा नहीं दिए जाने को लेकर टीडीपी ने एनडीए से अलग होने का फैसला किया है। राज्य के सीएम ऑफिस के मुताबिक, पार्टी अध्यक्ष चंद्र बाबू नायडू ने शुक्रवार सुबह पोलितब्यूरो के सदस्यों से टेलिकॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस मुद्दे पर चर्चा की थी। इसमें सभी सदस्यों ने एनडीए से अलग होने के फैसले को सही बताते हुए सरकार के खिलाफ अलग से अविश्वास प्रस्ताव लाने का भी समर्थन किया। दिल्ली में बीजेपी से गठबंधन तोड़ने का एलान करते हुए टीडीपी नेताओं ने कहा कि बीजेपी का मतलब है ‘ब्रेक जनता प्रॉमिस’ (जनता से वादा तोड़ो)।टीडीपी सांसद थोटा नरसिम्हन ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि पार्टी सरकार के खिलाफ सोमवार को संसद में अलग से एक अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगी। इससे पहले वाईएसआर कांग्रेस भी शुक्रवार को सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने की बात कह चुकी है।टीडीपी का ये फैसला तब आया है जब लोकसभा चुनाव को सिर्फ एक साल रह गया है। बता दें कि इसी सिलसिले में टीडीपी के दो मंत्रियों ने पिछले हफ्ते कैबिनेट से इस्तीफ दे दिया था। आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रघुवीर रेड्डी ने कहा हे कि वाईएसआर कांग्रेस और टीडीपी की ओर से संसद में पेश होने वाले अविश्वास प्रस्ताव का कांग्रेस समर्थन करेगी।वित्त मंत्री जेटली का कहना है कि 14वें वित्त आयोग के बाद अब यह दर्जा नॉर्थ-ईस्ट और पहाड़ी राज्यों के अलावा किसी और को नहीं मिल सकता है। आंध्र पोलवरम योजना और अमरावती के लिए 33-33 हजार करोड़ रु. मांग रहा है। केंद्र का कहना है कि पोलवरम के लिए 5 हजार करोड़ और अमरावती के लिए ढाई हजार करोड़ रु. दे चुका है। इसमें गुंटूर, विजयवाड़ा के लिए 500-500 करोड़ रु. शामिल हैं। केंद्र के मुताबिक आंध्र प्रदेश के अलावा बिहार, ओडिशा, राजस्थान व गोवा की सरकारें केंद्र सरकार से विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग कर रही हैं। आंध्र का कहना है कि तेलंगाना बनने से प्रदेश का राजस्व घाटा 16 हजार करोड़ रु. हो गया है। वहीं, केंद्र के मुताबिक असल घाटा 4 हजार करोड़ का है।अभी 11 राज्य अरुणाचल, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और असम को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है। इसमें 90% तक केंद्रीय अनुदान मिलता है। बेहद दुर्गम इलाके वाला पर्वतीय क्षेत्र, अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा, प्रति व्यक्ति आय और राजस्व काफी कम आदि विशेष दर्जे की शर्तें हैं।
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