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यूपी राज्यसभा चुनाव में 10वीं सीट पर सबसे बड़ा सस्पेंस, एक-एक विधायक पर नजर

     Last Updated:(11:50 AM) 22 Mar 2018
लखनऊ 
राज्यसभा की 59 सीटों के लिए 23 मार्च को होने जा रहे मतदान ने एक बार फिर देश के सियासी पारे को ऊपर उठा दिया है। इसमें सबसे ज्यादा रोचक और दम साधने वाला चुनाव यूपी में होने जा रहा है। यूपी से इस बार कुल 10 उम्मीदवार राज्यसभा पहुंचने वाले हैं। इसमें से 8 सीटों पर बीजेपी की जबकि एक पर समाजवादी पार्टी की जीत पक्की है। यूपी की 10वीं सीट पर सबसे बड़ा सस्पेंस बना हुआ है। इस सीट पर एसपी-कांग्रेस जहां बीएसपी को जिताने में जुटी हैं, वहीं बीजेपी ने भी 9वां कैंडिडेट दे रखा है। बुधवार रात लखनऊ में अखिलेश जहां डिनर पार्टी में अपने संख्याबल की पैमाइश कर चुके हैं तो योगी भी आवास पर सहयोगियों की बैठक ले चुके हैं। अब मामला सेट है और सबको कल की वोटिंग के बाद नतीजों का इंतजार है।लोकसभा उपचुनाव में दो सीट गंवा चुकी बीजेपी हर हाल में इस सीट को जीतना चाहती थी। वहीं, एसपी-बीएसपी-कांग्रेस का पूरा जोर बीएसपी कैंडिडेट को जिताने पर है। एक-एक विधायक पर नजर बनी हुई है और संख्याबल पाने के लिए डिनर और जोड़-तोड़-गठजोड़ पॉलिटिक्स जैसे हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं।10वीं सीट के लिए यह चुनाव इतना फंसा हुआ नहीं होता अगर नरेश अग्रवाल ने पाला नहीं बदला होता। दरअसल यूपी में राज्यसभा चुनावों की गणित के मुताबिक एक कैंडिडेट को जीत के लिए 37 विधायकों के मतों की जरूरत है। बीजेपी के पास 311 और सहयोगियों अपना दल एस (9) व सुभासभा (4) को मिलाकर एनडीए के कुल 324 विधायक हो रहे हैं। वहीं एसपी के पास 47, बीएसपी के 19, कांग्रेस के 7, आरएलडी के 1, निषाद के 3 और निर्दलीय तीन विधायक हैं।अगर सहयोगी बीजेपी के साथ रहे आठ उम्मीदवारों को 37-37 वोट मिलने के बाद बीजेपी के पास 28 वोट बचे हैं। अपनी उम्मीदवार जया बच्चन को जिताने के बाद एसपी के पास 10 विधायक बचे हैं। इसमें बीएसपी के 19, कांग्रेस के 9 और आरएलडी के 1 विधायक को मिला दिया जाए तो संख्या बल 37 पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में बीएसपी के कैंडिडेट भीमराव आंबेडकर को कोई दिक्कत नहीं होती है, लेकिन यहीं नरेश अग्रवाल फैक्टर राह का रोड़ा बन गया। 

दरअसल नरेश अग्रवाल के बीजेपी में शामिल होने के बाद इस बात की आशंका तेज हो गई है कि एसपी से विधायक उनके बेटे नितिन अग्रवाल क्रॉस वोटिंग करेंगे। योगी आदित्यनाथ के आवास पर पहुंच नितिन इसके संकेत भी दे चुके हैं। ऐसे में एसपी का एक वोट खुद-ब-खुद कम नजर आ रहा है। उधर, बीजेपी का दावा है कि उसका 9वां कैंडिडेट भी प्रथम वरीयता के मतों से ही जीत जाएगा। हालांकि ऐसा होने के लिए बीजेपी को 9 विधायकों की जरूरत है।
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