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सोहराबुद्दीन केस में जज रहे लोया की मौत की जांच एसआईटी नहीं करेगी

     Last Updated:(12:19 PM) 19 Apr 2018
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एएम खानविलकर की अदालत ने कहा कि ये याचिकाएं राजनीतिक हित साधने और चर्चा बटोरने के लिए जारी की गई लगती हैं, लेकिन इनका कोई ठोस आधार नहीं है। सूत्रों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि इस मामले में 4 जजों के बयानों पर संदेह का कोई कारण नहीं बनता। यही नहीं शीर्ष अदालत ने याचिकाओं को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह याचिकाएं न्यायपालिका की छवि को खराब करने का एक प्रयास हैं। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि पीआईएल में कोई सत्यता नहीं है और यह एक तरह से न्यायपालिका की छवि को खराब करने का प्रयास जान पड़ती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जज लोया की मौत प्राकृतिक थी और उसमें संदेह करने का कोई कारण नहीं बनता। यही नहीं शीर्ष अदालत ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को अदालत तक लाया गया है और न्यायपालिका की छवि को बिगाड़ने की कोशिश है। ऐसे में याचियों पर यदि अदालत की अवमानना का केस चलाया जाए तो गलत नहीं होगा। भूषण ने कहा कि हमारे लिए यह काला दिन है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि 4 जजों का कोई एफिडेविट पर बयान तक सुप्रीम कोर्ट के सामने नहीं आया था, फिर भी उनके आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि ईसीजी रिपोर्ट में हार्ट अटैक से मौत की बात नहीं कही गई है। हिस्टोपैथॉलजी की रिपोर्ट में भी यह बात नहीं कही गई है, लेकिन बिना एफिडेविट के जजों के बयान के आधार पर मांग खारिज करना दुर्भाग्यपूर्ण है। 
शीर्ष अदालत की बेंच ने कहा कि मामले के दौरान याचियों ने सुप्रीम कोर्ट के जजों पर बेवजह के आरोप लगाए और संवैधानिक मर्यादा का पालन नहीं किया। यही नहीं कोर्ट ने ऐसी जनहित याचिकाओं को राजनीतिक स्वार्थ साधने और बदले की राजनीति का उपकरण करार दिया। 
जज लोया की मौत की एसआईटी जांच की मांग करते हुए सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने कहा था कि लोया की मौत संदिग्ध है और मामले की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि लोया को कभी हार्ट की परेशानी नहीं थी और न ही उनके परिवार में दिल से जुड़ी किसी को कोई बीमारी थी। मामले की सुनवाई के दौरान इंदिरा जयसिंह ने कहा था कि जब भी कोई संदिग्ध मौत होती है तो सीआरपीसी की धारा-174 के तहत कार्रवाई होती है, लेकिन इस मामले में ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई। यहां तक कि कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। प्रशांत भूषण ने दलील दी थी कि ईसीजी की रिपोर्ट से साफ है कि जज लोया की मौत हार्टअटैक से नहीं हुई है। 
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