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कोरियाई देशों के बीच गिरी 6 दशक पुरानी दुश्मनी की दीवार, मून का हाथ पकड़ अपनी सीमा में लाए किम जोंग

     Last Updated:(12:19 PM) 27 Apr 2018
सिउल. किम जोंग-उन शुक्रवार को पहली बार अपने देश का सैन्य बॉर्डर पार कर पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया पहुंचे। यहां पहुंचते ही उन्होंने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन से मुलाकात की। इसी के साथ दोनों देशों की आजादी के 65 साल बाद ये पहला मौका है जब उत्तर कोरिया का कोई तानाशाह दक्षिण कोरिया पहुंचा हो। 1953 के कोरियाई युद्ध के बाद ही दोनों देशों का बंटवारा हुआ था।उत्तर कोरिया से सटा सैन्य बाॅर्डर पार करने के बाद किम जोंग डिमिलिट्राइज्ड जोन (असैन्य क्षेत्र) में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेई-इन से मिले। यहां दोनों ने थोड़ी देर बातचीत की। इस दौरान एक मौका ऐसा भी आया जब मून जेई कुछ देर के लिए उत्तर कोरिया के बॉर्डर पहुंच गए थे।बातचीत के कुछ ही देर बाद दोनों नेता दक्षिण कोरिया के पन्मुन्जोम स्थित पीस हाउस (शांति घर) में चले गए थे। पीस हाउस दोनों देशों के बीच असैन्य क्षेत्र में बना मिलिट्री कंपाउंड है। किम जोंग ने अंदर जाने से पहले गेस्ट बुक में लिखा, “इतिहास के शुरुआती चरण और शांति के दौर में यहां से नया इतिहास शुरू होता है।”

व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अमेरिका को उम्मीद है कि दोनों देश आपस में शांति और समृद्धि की बात करेंगे। इस समिट को जून में होने वाली किम जोंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच होने वाली मीटिंग के प्रस्ताव के रूप में देखा जा रहा है। बता दें कि उत्तर कोरिया का कोई भी तानाशाह आज तक किसी अमेरिकी राष्ट्रपति से नहीं मिला है। माना जा रहा है कि किम जोंग और मून जे के बीच बातचीत में उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम अहम मुद्दा रहेगा। किम जोंग-उन पहले ही अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करने की बात कह चुके हैं। हालांकि, दक्षिण कोरिया के मुताबिक ये उत्तर कोरिया का ये फैसला मुश्किल हो सकता है क्योंकि उसने कई एडवांस टेक्नोलॉजी वाले हथियार (जिनमें मिसाइलें भी शामिल हैं) बना लिए हैं। बता दें कि उत्तर और दक्षिण कोरिया 1953 के कोरियाई युद्ध के बाद दो अलग देश बने थे। इसके बाद से ही बॉर्डर जुड़े होने के बावजूद दोनों देशों में तल्खी काफी बढ़ गई थी।  पहली बार साल 2000 में दोनों देशों ने करीबी बढ़ाने के लिए समिट में हिस्सा लिया था। हालांकि साल 2000 और 2007 दोनों ही बार समिट उत्तर कोरिया के प्योंग्यांग में आयोजित की गई। इन्हें शुरू करने का श्रेय किम जोंग-उन के पिता किम जोंग-इल को दिया जाता है। ये पहली बार है जब किम जोंग-उन बॉर्डर पार कर दक्षिण कोरिया गए हैं।

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