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कर्नाटक: बसपा की मदद से जेडीएस का वोट शेयर 2% तक बढ़ा तो वह भाजपा-कांग्रेस को रोक सकती है

     Last Updated:(11:29 AM) 09 May 2018
नई दिल्ली.कर्नाटक विधानसभा चुनाव के ज्यादातर प्री-पोल सर्वे में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया गया। अगर ये सर्वे सही साबित होते हैं तो जनता दल सेक्युलर निर्णायक भूमिका में होगी। दो स्थितियों में भाजपा और कांग्रेस को जेडीएस से चुनौती मिल सकती है। पहली- पिछले विधानसभा चुनाव में जेडीएस 16 ऐसी सीटों पर हारी थी, जहां मार्जिन 5000 से कम था। इस बार बसपा, एनसीपी, टीआरएस और ओवैसी की एआईएमआईएम की मदद से अगर वह इन सीटों को जीत में तब्दील कर लेती है तो उसकी सीटों का आंकड़ा बढ़ जाएगा। दूसरी- पिछले तीन चुनावों का ट्रेंड देखें तो किसी भी पार्टी के वोट शेयर में सिर्फ 1 से 4 फीसदी के उछाल पर ही सीटों का बड़ा फायदा होता है। ऐसे में जेडीएस के मामले में यह उछाल आया तो किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा।इनमें से भी 5 सीटें ऐसी हैं जो जेडीएस अपने गढ़ दक्षिण कर्नाटक (ओल्ड मैसूर रीजन‌‌‌) में हारी थी। यहां उसके जीत की उम्मीद और भी ज्यादा है। इस इलाके की कुल 60 सीटों में से पिछली बार जेडीएस को 25 सीटें मिली थीं।राज्य में वोक्कालिगा की कुल आबादी करीब 11% है। दक्षिण कर्नाटक इनका गढ़ है। जेडीएस के मुखिया और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा भी इसी समुदाय से हैं। इस वजह से पार्टी यहां काफी मजबूत है। इस बार जेडीएस को पहली बार एकसाथ चार दलों का समर्थन मिला है। उसने बसपा, एनसीपी, टीआरएस और ओवैसी की एआईएमआईएम से गठबंधन किया है। पिछले चार चुनावों में इन सभी का वोट शेयर 1 से 2% तक रहा। जेडीएस को इसका फायदा मिल सकता है। सबसे ज्यादा फायदा बसपा के साथ गठबंधन से होगा। क्योंकि पिछले चुनाव में मायावती की पार्टी ने 224 सीटों में से 175 पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। हर सीट पर इन्हें औसतन 1% वोट मिला था।एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दलितों ने देशभर में आंदोलन किया था। इसी को ध्यान में रखते हुए जेडीएस ने बसपा से गठबंधन किया है। बसपा ने 51 एससी-एसटी सीटों में से 8 पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। ऐसे में इन सीटों पर दलित वोट लामबंद हो सकते हैं।दिसंबर में केंद्रीय मंत्री अनंतकुमार हेगड़े ने कहा था कि हम संविधान बदलने आए हैं। तब उनके इस बयान को कोटा सिस्टम के खिलाफ माना गया।राज्य में एसटी वर्ग से आने वाले भाजपा के बड़े नेता और पार्टी सांसद बी सिरामुलु और येदियुरप्पा के बीच मनमुटाव की भी बात कही जा रही है।जेडीएस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी को भरोसा है कि वे किंगमेकर नहीं किंग बनेंगे। हाल ही में आए सर्वे पर उन्होंने कहा था, "हम ऐसे सर्वे पर विश्वास नहीं करते...2004 में हुए प्री-पोल सर्वे में जेडीएस को सिर्फ 2 सीटें दी गई थीं। लेकिन हमने चुनाव में 58 सीटों पर जीत हासिल की और दो पार्टियों (जेडीएस-कांग्रेस) के गठबंधन की सरकार बनी। इस बार कोई खंडित जनादेश नहीं होगा। कर्नाटक में हमारी सरकार बनेगी। मैं किंगमेकर नहीं, बल्कि किंग बनूंगा।
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