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जिन्ना की तस्वीर विवाद: भारत में मुस्लिमों-पाक को लेकर असहिष्णुता और पूर्वाग्रह बढ़ रहा है: पाकिस्तान

     Last Updated:(10:44 AM) 11 May 2018
इस्लामाबाद. पाकिस्तान ने कहा है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर का विवाद दिखाता है कि भारत में मुस्लिमों और पाक को लेकर असहिष्णुता और पूर्वाग्रह बढ़ रहा है। बता दें कि हाल ही में एएमयू में जिन्ना की तस्वीर हटाने को लेकर हिंदू संगठनों और छात्र संघ में विवाद हो गया था।पाक के विदेश विभाग के प्रवक्ता डॉ. मोहम्मद फैसल ने कहा, "एएमयू में लाइफटाइम मेंबर्स की तस्वीर लगाने की परंपरा है। वहां जिन्ना की तस्वीर तो 1938 से लगी हुआ है।" "जिन्ना की तस्वीर हटाने की मांग एक सांसद ने की। ये दिखाता है कि भारत में मुस्लिमों और पाकिस्तान को लेकर असहिष्णुता और पूर्वाग्रह बढ़ रहा है। ये भारतीयों के लिए भी काफी खतरनाक है।" "पूरा मामला दिखाता है कि भारतीय समाज में धार्मिक कट्टरता बढ़ रही है। जो सत्ता में हैं, वो उसे बढ़ावा दे रहे हैं।""वहीं, पाकिस्तान में देखें तो स्थिति इससे उलट है। इस्लामाबाद म्यूजियम में गांधी की तस्वीर अब भी लगी हुई है।फैसल ने कहा, "पाक सरकार औऱ जनता कश्मीर में भारतीय सेना की कार्रवाई की कड़ी निंदा करती है। हम चाहते हैं कि वैश्विक समुदाय इस पर आवाज उठाए।" "भारत ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कॉर्पोरेशन (ओआईसी) में किसी भी रूप में प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता क्योंकि वह बीते 70 सालों से कश्मीर में मानवाधिकारों का हनन कर रहा है।" ओआईसी, 57 मुस्लिम देशों का संगठन है।हम भारत से हर मुद्दे मसलन जम्मू-कश्मीर विवाद, सर क्रीक, सियाचिन और आतंकवाद पर बिना शर्त बातचीत करना चाहते हैं।" फैसल ने कहा, "हम अमृतसर जेल में बंद नसरीन की रिहाई चाहते हैं। वह पेट के ट्यूमर और लिवर की बीमारी से पीड़ित है। इसके लिए भारत में मौजूद पाक मिशन लगातार बात कर रहा है।विवाद भाजपा सांसद और एएमयू कोर्ट मेंबर सतीश गौतम की चिट्‌ठी से शुरू हुआ था। छात्रसंघ हॉल में लगी मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर पर सवाल उठाते हुए उन्होंने 26 अप्रैल को वीसी प्रो. तारिक मंसूर को पत्र लिखा।  30 अप्रैल को पत्र सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने जिन्ना की तस्वीर हटाने की मांग की। वहीं, एएमयू छात्र संघ इसे नहीं हटाने की बात कहता रहा।  तस्वीर हटाने के लिए हिंदू युवा वाहिनी के कुछ कार्यकर्ता एएमयू कैंपस में घुस गए थे। इस दौरान हुए लाठीचार्ज में कई छात्र घायल हो गए थे। हिंसक घटनाओं को देखते हुए यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं 12 तक स्थगित कर दी गई थीं। मंसूर ने कहा था, "यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के ऑफिस में 1938 से ही जिन्ना की तस्वीर लगी है। ये कोई मसला नहीं है।
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