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कानूनी पैंतरे और लिंगायत कार्ड से विपक्षी विधायकों का समर्थन हासिल करेगी BJP

     Last Updated:(11:53 AM) 18 May 2018
बीजेपी के शीर्ष नेता इस बात को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लेंगे। बीजेपी फ्लोर टेस्ट के लिए मोर्चाबंदी तो कर ही रही है, दूसरी तरफ कांग्रेस के लिंगायत विधायकों को अपने तरफ करने की भी कोशिश में जुटी है। राजनीतिक संकेतों पर नजर डालें तो स्पष्ट है कि गुरुवार को येदियुरप्पा लिंगायत मठ पहुंचे और वहां उन्होंने संत शिवकुमार स्वामी का आशीर्वाद लिया। हालांकि, अभी पार्टी के पास बहुमत से सात विधायक कम हैं। बीजेपी की अल्पमत वाली सरकार को अगर सत्ता में बना रहना है, तो उसे विधानसभा में मौजूद सदस्यों का बहुमत हासिल करना होगा। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स की बातचीत हुई। उनका कहना है कि उन्हें दिल्ली में मौजूद अपने हाईकमान पर पूरा भरोसा है। हालांकि, वे पार्टी की मौजूदा रणनीति पर ज्यादा बात नहीं करना चाहते थे। इस समय बीजेपी के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं। पार्टी ‘ऑपरेशन कमल’ की भी कोशिश नहीं कर रही है। यह एक रणनीति है, जिसका उसने इसी तरह की परिस्थितियों में प्रयोग किया था। बीजेपी ने ‘ऑपरेशन कमल’ के तहत विपक्षी पार्टी के विधायकों को उनकी सीट से इस्तीफा दिला दिया था और उन्हें अपने टिकट पर लड़ाकर जादुई आंकड़ा हासिल किया था।बीजेपी के कानूनी सलाहकार ऐंटी-डिफेक्शन लॉ (दल-बदल कानून) की स्टडी कर रहे हैं। वे इस बात का तोड़ निकालने की कोशिश कर रहे हैं कि किस तरह से विपक्षी पार्टी के विधायक बिना अयोग्य घोषित हुए सरकार बनाने में मदद कर सकते हैं। बीजेपी कानूनन विपक्षी पार्टी के धड़े को पार्टी में शामिल करने की योजना नहीं बना रही है। यह काफी बड़ी चुनौती है। इसके लिए जेडीएस (37) और कांग्रेस (78) के एक-एक तिहाई सदस्यों को अपने पक्ष में लाना होगा। मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने शपथ लेने के बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस और जेडी (एस) के सदस्यों से अपने विवेक के अनुसार वोट करने की अपील की। बीजेपी ने अपनी रणनीति का खुलासा नहीं किया है, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि विश्वास मत वाले दिन विपक्षी पार्टी के विधायकों को एक भरोसेमंद हिस्सा वोटिंग से दूर रह सकता है।पार्टी के कानूनविदों की सोच के मुताबिक, विधानसभा में शपथ लेने से पहले किसी भी सदस्य पर उसके दल का निर्देश लागू नहीं होता है। यह चीज उन्हें ऐंटी-डिफेक्शन लॉ (दल-बदल कानून) से बचाती है और उनकी सदस्यता बरकरार रखती है। अगर बीजेपी की रणनीति काम करती है, तो ये विधायक अपनी पार्टी को शर्मिंदा करना जारी रखेंगे। ऐसी परिस्थिति में उन्हें पार्टी से निकाले जाने का डर नहीं रह जाएगा। इसके बाद पार्टी को उनके कार्यों की अनदेखी करनी पड़ेगी। वह उन्हें निष्कासित करने से भी बचेगी क्योंकि ऐसा करने से विधायक को ही फायदा होगा और सत्ताधारी दल में शामिल हो जाएगा। 
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