Friday, September 21, 2018 Home   |   Sign in   |   Contact us   |   Help  
  View Certificate
 
होम राज्य देश संपादकीय युवा खेल फ़िल्मी सितारे वीडियो कैरियर आर्थिक
 

उ. कोरिया के साथ करार की उम्मीद: ट्रम्प

     Last Updated:(11:11 AM) 12 Jun 2018
सिंगापुर. डोनाल्ड ट्रम्प और उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग-उन के बीच मंगलवार को पहली बार यहां के कापेला होटल में मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने करीब 12 सेकंड तक हाथ मिलाया। इसके बाद इनके बीच करीब 45 मिनट तक बातचीत चली। ट्रम्प ने कहा कि किम के साथ मुलाकात बहुत अच्छी रही। किम के साथ करार भी हो सकता है। वहीं, किम ने कहा कि लोगों को ये मुलाकात किसी साइंस फिक्शन फिल्म की तरह लग सकती है। बता दें कि इसके लिए 6 महीने से कोशिशें हो रही थीं। बीच में कई बार ऐसा लगा कि दोनों नेता शायद ही आमने-सामने आएं। ट्रम्प ने एक बार मुलाकात रद्द भी कर दी थी, लेकिन किम ने उम्मीद नहीं छोड़ी।71 साल के डोनाल्ड ट्रम्प और 34 साल के किम जोंग-उन के बीच इस मुलाकात में कैमिस्ट्री अच्छी दिखी। दोनों ने पहली मुलाकात में करीब 12 सेकंड तक हाथ मिलाया। लेकिन जानकार इसे गर्मजोशी की मुलाकात नहीं मान रहे हैं। क्योंकि ट्रम्प किसी भी राष्ट्राध्यक्ष या अफसर से मिलते वक्त उनसे देर तक हाथ मिलाते हैं और सामने वाले का हाथ जोर से हिलाते हैं। हाल में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे से उन्होंने 19 सेकंड तक हाथ मिलाया था। किम से मुलाकात में ऐसा उनकी बेहद गर्मजोशी भरा भाव नहीं दिखा। किम ही ट्रम्प का हाथ जोर से हिलाते दिखे।ट्रम्प और किम के बीच करीब यह मुलाकात मंगलवार को सिंगापुर के सेंटोसा द्वीप के कापेला होटल में हुई।इस मीटिंग के बाद ट्रम्प ने कहा कि किम के साथ मुलाकात बहुत अच्छी रही। हम दोनों के बीच बेहतर रिश्ते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि वे और किम मिलकर बड़ी समस्या को हल करेंगे। हम साथ मिलकर काम करेंगे। हम हर तरह से उत्तर कोरिया का ध्यान रखेंगे। मैं बातचीत को लेकर आश्वस्त हूं। हमें कामयाबी मिलेगी और हमारे रिश्ते भी शानदार रहेंगे। इस बैठक के पहले ट्रम्प ने कहा थाा कि वे पहले मिनट में किम के हाव-भाव देखकर बता देंगे कि समिट कारगर होगी या नहीं। सीएनएन के मुताबिक यह मीटिंग बंद दरवाजे में हुई। दोनों ने करीब 45 मिनट तक बातचीत की।दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच पन्मुंजोम गांव में डिमिलिट्राइज्ड जोन (असैन्य क्षेत्र) हैं। पहले यहीं दोनों नेताओं के बीच मिलने की खबर थी, लेकिन अमेरिकी अफसर सुरक्षा कारणों से राजी नहीं हुए। तब ऐसी जगह पर विचार किया गया जो दोनों देशों के लिए भरोसेमंद रहे। तब सिंगापुर का नाम आया। इसकी वजह यह कि इस देश के अमेरिका और उत्तर कोरिया से बेहतर रिश्ते हैं।  सिंगापुर में उत्तर कोरिया का दूतावास भी है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच अच्छे कारोबारी संबंध भी हैं। यहां विरोध-प्रदर्शन की भी मनाही है।
  टिप्पणी

 

  फोटोगैलरी
 
 
 
होम राज्य देश संपादकीय युवा खेल फ़िल्मी सितारे वीडियो कैरियर आर्थिक Youtube Video Facebook Twitter in.com