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जम्मू-कश्मीर में 10 साल में चौथी बार राज्यपाल शासन

     Last Updated:(10:54 AM) 20 Jun 2018
जम्मू-कश्मीर में पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी (पीडीपी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की गठबंधन सरकार गिरने के बाद राज्यपाल शासन लग गया है। राष्ट्रपति की मंजूरी से यहां अगले 6 महीने की अवधि के लिए राज्यपाल शासन लगा रहेगा। बता दें कि जम्मू-कश्मीर में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है बल्कि पिछले 4 दशक से यह सिलसिला जारी है। अनिश्चित और अल्पायु सरकार के चलते यहां पिछले चार दशक में यह 8वां राज्यपाल शासन है।शेख अब्दुल्ला की नैशनल कॉन्फ्रेंस से कांग्रेस के समर्थन वापस लेने के बाद 26 मार्च 1977 को यहां राज्यपाल शासन लागू हुआ था जो 105 दिन तक चला था। 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से समझौता के बाद यहां नैशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार बनी थी। चुनाव के बाद 9 जुलाई 1977 को शेख अब्दुल्ला ने दोबारा सत्ता में वापसी की और पांच साल तक शासन किया6 मार्च 1986 को एक बार फिर कांग्रेस के समर्थन वापस लेने के बाद जम्मू-कश्मीर में गुलाम मोहम्मद शाह की अल्पमत वाली सरकार गिर गई थी। तब राज्य में केंद्र शासन 246 दिन तक लागू रहा था। गुलाम मोहम्मद शाह खुद भी कुछ विधायकों के साथ मिलकर नैशनल कॉन्फ्रेंस से अलग होकर सीएम बने थे। राज्यपाल शासन के खत्म होने के बाद फारूक अब्दुल्ला ने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ समझौता कर सरकार बनाई।जम्मू-कश्मीर में अभी तक का सबसे लंबा राज्यपाल शासन 1990 में लगा था। उस दौरान जगमोहन मल्होत्रा की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति के विरोध में फारूक अब्दुल्ला ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। इस वजह से जम्मू-कश्मीर में तीसरी बार राज्यपाल शासन लागू हुआ था। इसके बाद 1996 चुनाव में नैशनल कॉन्फ्रेंस ने दोबारा सत्ता में वापसी की थी और फारूक अब्दुल्ला सीएम बने थे।2002 में त्रिशंकु विधानसभा नतीजों के बाद फारूक अब्दुल्ला ने कार्यवाहक सीएम के रूप में सेवाएं देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद राज्य में फिर से राज्यपाल शासन लागू हुआ था जो 15 दिन तक चला था। इसके बाद मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों के साथ गठबंधन कर सरकार बना ली थी।2008 में अमरनाथ जमीन विवाद के दौरान पीडीपी के गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व वाली कांग्रेस से समर्थन वापस लेने के बाद एक बार फिर यहां 178 दिनों के लिए राज्यपाल शासन लागू हुआ था। इसके बाद 5 जनवरी 2009 को नैशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला ने सबसे कम उम्र के सीएम के रूप में शपथ ली थी।पीडीपी मुखिया और तत्कालीन सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद की मृत्यु के बाद यहां सातवीं बार राज्यपाल शासन लागू हुआ था। उस दौरान बीजेपी और पीडीपी ने कुछ समय के लिए सरकार गठन टालने का फैसला किया था। इसके बाद बीजेपी ने दोबारा पीडीपी से गठबंधन कर वहां सरकार बनाई और 4 अप्रैल को महबूबा मुफ्ती ने सीएम पद की शपथ ली थी।
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