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जीएसटी का एक साल, 11 महीने में सिर्फ एक बार छुआ 1 लाख करोड़ टैक्स कलेक्शन

     Last Updated:(11:48 AM) 02 Jul 2018
नई दिल्ली. गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) को एक साल हो गया है। एक जुलाई 2017 को सरकार ने 70 साल पुराना टैक्स स्ट्रक्चर खत्म कर दिया था। इसकी जगह जीएसटी लागू किया था। इसके तहत 5%, 12%, 18% और 28% के टैक्स स्लैब बनाए गए। एक बार अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन एक लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर गया। जब जीएसटी लागू हुआ, तब सवाल ये उठा था कि इससे सरकार को रेवेन्यू का नुकसान हुआ। लेकिन पिछले 11 महीने के आंकड़े बताते हैं कि 17 अप्रत्यक्ष करों के बदले जीएसटी लागू करने से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। जीएसटी लागू होने से पहले वित्त वर्ष 2016-17 में कुल इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 8.63 लाख करोड़ रुपए और हर महीने औसतन 72,000 करोड़ रुपए का कलेक्शन हुआ था। वहीं, जीएसटी के 11 महीनों यानी जुलाई 2017 से मई 2018 के बीच कुल जीएसटी कलेक्शन 10.06 लाख करोड़ रुपए और हर महीने औसत कलेक्शन 91 हजार करोड़ रुपए रहा। जून 2018 के आंकड़े आने बाकी हैं। सरकार के नजरिए से यह आंकड़ा इसलिए अच्छा है क्योंकि इसमें पेट्रोलियम उत्पादों, शराब, तंबाकू और मनोरंजन पर लगने वाला टैक्स शामिल नहीं है। कुछ देशों में गुड्स एंड सर्विस टैक्स के शुरुआती महीनों में महंगाई में इजाफा हुआ था। कनाडा में 1991 में 7% की दर से जीएसटी लागू किया गया था। इससे वहां महंगाई बढ़ी थी। कनाडा ने 2006 में टैक्स दर घटाकर 6% कर दी। 2008 में इसे 5% कर दिया गया। ऑस्ट्रेलिया और मलेशिया को भी जीएसटी के बाद महंगाई को काबू करने के लिए कदम उठाने पड़े। भारत में जीएसटी लागू होने के समय जुलाई 2017 में खुदरा महंगाई दर 2.36% थी। एक महीने बाद अगस्त 2017 में ये दर 3.36% पहुंच गई जो 5 महीने में सबसे ज्यादा थी। जीएसटी के 11 महीने बाद मई 2018 में महंगाई दर 4.87% रही।
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