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अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू: बीजद का वॉकआउट, शिवसेना ने कहा- वोटिंग में हिस्सा नहीं लेंगे

     Last Updated:(11:51 AM) 20 Jul 2018

नई दिल्ली.  लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हो गई है। बीजद के सभी 19 सांसदों ने चर्चा का बहिष्कार किया। उधर, शिवसेना भी वोटिंग में हिस्सा नहीं लेगी। एक दिन पहले पार्टी ने व्हिप जारी करके सरकार का साथ देने का ऐलान किया था। सबसे पहले तेदेपा सांसद जयदेव गल्ला ने प्रस्ताव पर चर्चा शुरू की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने आंध्रप्रदेश से किया वादा पूरा नहीं किया। 4 साल में आंध्र की जनता के लिए कुछ नहीं हुआ। हमने उनसे आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की थी।

सरकार ने राहुल गांधी के भूकंप वाले बयान पर हमला बोला। एनडीए सरकार को उम्मीद से ज्यादा समर्थन मिलेगा। दिसंबर में राहुल गांधी ने कहा था कि अगर नोटबंदी पर उन्हें संसद मे बोलने दिया गया तो भूचाल आ जाएगा। मोदीजी संसद में बैठ नहीं पाएंगे।  कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडगे का कहना है, हर पार्टी को 30 मिनट का समय मिलना चाहिए था। सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस को बोलने के लिए महज 38 मिनट मिले हैं। 130 करोड़ लोगों की समस्याओं और सरकार की गलतियों को उजागर करने के लिए क्या इतना समय काफी है? अविश्वास प्रस्ताव में प्रश्नकाल की तरह समय तय नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस और तेदेपा के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा से पहले प्रधानमंत्रीमोदी ने ट्वीट किया, ''आज हमारे संसदीय लोकतंत्र का अहम दिन है। मुझे साथी सांसदों पर भरोसा है कि वे इस मौके पर आगे आएंगे और बिना गतिरोध के सकारात्मक और विस्तृत चर्चा को आगे बढ़ाएंगे। हम देश की जनता और संविधान निर्माताओं के कर्जदार हैं। पूरे देश की नजरें हम पर रहेंगी।'' लोकसभा में इससे पहले कुल 26 अविश्वास प्रस्ताव पेश किए गए हैं। शुक्रवार को 27वें प्रस्ताव पर चर्चा होगी। पहला अविश्वास प्रस्ताव 1963 में जवाहर लाल नेहरू सरकार के खिलाफ आचार्य कृपलानी ने पेश किया था। इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ रिकॉर्ड 15 अविश्वास प्रस्ताव पेश किए गए थे। 1990 में वीपी सिंह, 1997 में देवेगौड़ा, 1999 में वाजपेयी फ्लोर टेस्ट हारे। इस तरह तीन मौकों पर वोटिंग के बाद सरकारें गिर गईं। एनडीए सरकार के खिलाफ पहला अविश्वास प्रस्ताव 1999 में आया। तब वाजपेयी सरकार एक वोट से गिर गई थी। वाजपेयी पहले ऐसे प्रधानमंत्री रहे, जो इतने कम अंतर से हारे। 1996 में भी वाजपेयी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था, लेकिन वोटिंग से पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। 2003 में कांग्रेस ने एक बार फिर वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। लेकिन, तब वाजपेयी के पास पर्याप्त बहुमत था।

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