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नोटबंदी / नए बड़े नोट अब पुरानों से ज्यादा, कैसे रुकेगा कालाधन?

     Last Updated:(12:51 PM) 22 Sep 2018
  • नोटबंदी के दो साल, तीन सवाल
  • हजार के पुराने नोटों से ज्यादा कीमत के दो हजार के नोट जारी हुए, इससे कालाधन कैसे कम होगा?
  • क्या 2000 के नोट से कालेधन को बढ़ावा नहीं मिला?
  • जब कालाधन सामने आने की रफ्तार 300% घट गई तो नोटबंदी का क्या फायदा?
  •        

नवंबर 2018 में नोटबंदी को दो साल पूरे होने जा रहे हैं। सरकार और भाजपा नोटबंदी को सबसे बड़ा और अच्छा कदम बता रही है, जबकि आर्थिक विशेषज्ञ पूछ रहे हैं कि इतना बड़ा पहाड़ खोदने के बाद भी मिला कुछ नहीं। और भी कई सवाल हैं। इन्हीं सवालों के जवाब सामने रख रहा है दैनिक भास्कर प्लस एप। जानिए आखिर नोटबंदी से देश, सरकार, अर्थव्यवस्था और आम आदमी को क्या मिला? क्या उम्मीद के अनुसार ब्लैकमनी पकड़ी गई? क्या नकली नोटों पर लगाम लगी? 

 

500 और 1000 के नोटों को हटाने का बड़ा मकसद कालेधन और नोटों की जमाखोरी पर लगाम लगाना था। नोटबंदी के बाद जारी हुए 2000 के नोटों की संख्या मार्च 2017 तक 328.5 करोड़ थी। इनका मूल्य 6 लाख 57 हजार करोड़ रुपए होता। देखा जाए तो यह आंकड़ा नोटबंदी के दौरान सर्कुलेशन में मौजूद 1000 रुपए के नोटों के मूल्य 6.32 लाख करोड़ रुपए से कहीं ज्यादा है। सरकार कहती है कि बड़े नोटों से कालाधन बढ़ता है। फिर पुराने हजार के नोटों से ज्यादा कीमत के दो हजार के नोट जारी करने से कालाधन कम कैसे हो गया?

 

इसके अलावा नोटबंदी के वक्त कुल करंसी में  500 और 1000 रुपए के नोटों की हिस्सेदारी 86 फीसदी थी, नोटबंदी के अगले साल यानी दिसंबर 2017 में 500 और 2000 के नोटों की हिस्सेदारी 90 फीसदी से ऊपर चली गई। यहां सवाल उठता है कि आखिर बड़े नोट पहले से ज्यादा ही जारी करने थे तो फिर नोटबंदी का मकसद क्या था? क्या 2000 के नोट से कालेधन को बढ़ावा नहीं मिला?

 

अप्रैल-18 में फिर से कैश की किल्लत सामने आई। इसके बाद सरकार ने 2000 के नोटों का सर्कुलेशन घटाना शुरू किया। कई आर्थिक और बैंकिंग विशेषज्ञों के मुताबिक 2000 के नोटों के जरिए ब्लैकमनी जमा करना ज्यादा आसान है। यह 500-1000 के नोटों की तुलना में संख्या में कम और कीमत में ज्यादा बैठते हैं।

 

आरबीआई की ताजा रिपोर्ट के आंकड़े
कुल करंसी
 : 15.41 लाख करोड़ रुपए   
नोटबंदी के बाद वापस आए नोटों का मूल्य : 15.31 लाख करोड़ रुपए
बैंकों तक नहीं लौटे नोटों का मूल्य : 10,000 करोड़ रुपए

  टिप्पणी

 

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